सही तरीके से शिवलिंग पूजा विधि अपनाने से बहुत जल्दी मनोकामना पूर्ति होती है। धर्माचार्यों के मतानुसार, पूजा के लिए सुबह 5 बजे से 11 बजे तक के समय को सबसे शुभ माना गया है। इस शुभ समय में 30–40 मिनट तक सही पूजन विधि से आराधना करने पर भगवान शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
इस फलदायी पूजा में आवश्यक नियमों, सही विधि और उचित तैयारी का विशेष ध्यान रखा जाए, अन्यथा मनवांछित फल प्राप्त नहीं होता। बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि पार्थिव शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है और इसे सही तरीके से कैसे तैयार किया जाता है। इस लेख में इन्हीं सभी प्रश्नों के विश्वसनीय उत्तर मिलेंगे।
शिवजी में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन बातों को जानना अत्यंत आवश्यक है, पूजा की संपूर्ण विधि, मंत्रों एवं जलाभिषेक का सही तरीका, तथा पूजा प्रारंभ करने से पहले किए जाने वाले वे तीन अत्यंत आवश्यक कार्य, जिन्हें न करने पर पूजा असफल या अधूरी मानी जाती है।
पार्थिव शिवलिंग शब्द का वास्तविक अर्थ
पार्थिव शब्द का संबंध पृथ्वी से है, अर्थात जो पृथ्वी से बना हो। पार्थिव शिवलिंग वह शिवलिंग होता है, जिसे गीली मिट्टी या रेत (अधिकतर गीली मिट्टी) से अपने हाथों से निर्मित किया जाता है। इसके पश्चात विधि-विधानपूर्वक पूजा कर, पूर्ण श्रद्धा के साथ उसका विसर्जन किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से बिगड़े हुए कार्य शीघ्रता से बनने लगते हैं। इस प्रभावी पूजा से पुण्य की प्राप्ति होती है और गहन आत्मिक शांति मिलती है। इसे करने से व्यक्ति तथा उसके परिवार पर भगवान शिवजी की कृपा सदैव बनी रहती है।
पूजा करने से पहले करें ये 3 अनिवार्य काम
शिवलिंग पूजा विधि का यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसे लेकर लोग अक्सर चिंतित रहते हैं। यदि मनचाहा फल प्राप्त करना है, तो इन तीन कार्यों को बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ न करें:
1. मन को शांत करें – पूजा प्रारंभ करने से पहले किसी एकांत स्थान पर कुछ समय आँखें बंद कर शांत भाव से बैठें और शिवजी का ध्यान करें। इससे मन की भाग-दौड़ स्थिर होती है। मानसिक शांति के बिना की गई पूजा निष्फल मानी जाती है।
2. नकारात्मक विचारों से दूरी बनाएँ – मन में किसी के प्रति क्रोध, ईर्ष्या या द्वेष का भाव न रखें। भक्ति का संबंध भाव से होता है, इसलिए भाव को शुद्ध रखें, इसके बिना फल की कामना करना व्यर्थ माना जाता है।
3. स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें – गुरुओं और ऋषि-मुनियों ने किसी भी धार्मिक कार्य को प्रारंभ करने से पहले शरीर, वस्त्र और पूजा-स्थल की स्वच्छता पर विशेष बल दिया है। उनके अनुसार, शुद्धता ही पार्थिव पूजा की आत्मा है।
पार्थिव शिवलिंग कैसे तैयार करें?
पार्थिव शिवलिंग बनाना प्रारंभ करते समय प्रेमभाव के साथ भगवान शिवजी का सुमिरन करते रहें। शिवलिंग निर्माण के लिए किसी साफ़ और पवित्र स्थान (नदी या सरोवर) से मिट्टी लाएँ। उसमें गंगाजल या स्वच्छ जल मिलाकर अच्छी तरह सान लें और शिवलिंग का आकार न तो अधिक बड़ा रखें और न ही जटिल।
ध्यान रखें:
शिवलिंग बनाते समय किसी प्रकार की जल्दबाज़ी या हँसी-मज़ाक बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। अक्सर देखा गया है कि जब शिवलिंग लोगों के मन के अनुसार नहीं बनता, तो वे उसका उपहास करने लगते हैं।
शिवलिंग की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
किसी भी पूजा में सबसे पहले व्यक्ति का भाव अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, उसके बाद पूजन सामग्री का स्थान आता है। पार्थिव शिवलिंग पूजा के लिए अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, किंतु जो भी सामग्री उपयोग में लाई जाए, उसकी शुद्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मुख्य पूजन सामग्री – स्वच्छ जल या गंगाजल, बेलपत्र, कपूर, धूप-दीप, सफेद पुष्प, दूध (यदि संभव हो), चंदन, फल तथा अक्षत (चावल)। यदि कोई सभी वस्तुओं का उपयोग करने में असमर्थ हो, तो निराश न हों। भोले बाबा अत्यंत दयालु हैं, वे कम सामग्री में भी अपने भक्त की पूजा स्वीकार करते हैं, बस अंतर्भाव शुद्ध होना चाहिए।
पार्थिव शिवलिंग की पूजा विधि
यह पूजा विधि अत्यंत सरल है; इस दौरान मन को एकाग्र रखना सबसे आवश्यक होता है। निम्नलिखित क्रम के अनुसार (यदि संभव हो) दी गई प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए पूजन करें:
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को स्वच्छ कर पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करें।
- शिवलिंग को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर स्थापित करें।
- मंत्र-जप करते हुए या मौन धारण कर पूजन करें।
- जल, दूध, दही अथवा गंगाजल से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, पुष्प तथा चंदन अर्पित करें।
- ऋतु के फल और मिठाई का भोग लगाएँ।
- अंत में पुष्पांजलि अर्पित कर भगवान शिव से क्षमा-प्रार्थना करें।
शिवलिंग पूजन के लिए मंत्र
भारत के लगभग सभी धार्मिक स्थलों में मंत्रोच्चारण का विशेष महत्व है। मंत्रों में विशिष्ट ऊर्जा निहित होती है, इनके जाप से उत्पन्न होने वाले स्पंदन से शरीर को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मंत्र पूजा को शक्ति और गति प्रदान करते हैं।
शिवलिंग पूजा के लिए अधिक मंत्रों का ज्ञान होना आवश्यक नहीं है। केवल इन सरल और प्रभावी मंत्रों का जाप करना ही पर्याप्त होता है:
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ये दोनों ही भगवान शिवजी के अत्यंत प्रभावी मंत्र माने जाते हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार इनमें से किसी एक मंत्र का जाप कर सकते हैं। ध्यान रहे कि मंत्र-जप में संख्या से कहीं अधिक महत्व भाव और आस्था का होता है।
शिवलिंग पर जल कैसे चढ़ाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जल चढ़ाते समय मन के भाव पर विशेष ध्यान रखना चाहिए, इसी के आधार पर पूजा का फल निर्धारित होता है। जल अर्पित करने के लिए उत्तर दिशा की ओर मुख करके तांबे के लोटे से जल चढ़ाएँ। जल को धीरे-धीरे, पतली धार में और बैठकर अर्पित करना चाहिए।
इस दौरान निरंतर ॐ नमः शिवाय या अन्य शिव मंत्रों का जप करते रहें। ध्यान रहे कि जल चढ़ाते समय धार टूटनी नहीं चाहिए, क्योंकि प्रायः लोग यहीं अनजाने में गलती कर बैठते हैं।
क्या इस पूजा में वर्ग या आयु का बंधन होता है?
पार्थिव शिवलिंग की पूजा कोई भी कर सकता है, इसमें किसी प्रकार का कोई बंधन नहीं होता। चाहे महिला हो या पुरुष, गृहस्थ हो या संन्यासी, अथवा विद्यार्थी, हर कोई श्रद्धाभाव से इस पूजा को कर सकता है। हर पूजा में भारतीय संस्कृति की गरिमा झलकती है, इसलिए किसी भी पूजा को प्रारंभ करने से पूर्व उसके पूजा विधि का पालन अवश्य करना चाहिए।
अंत में ध्यान देने योग्य बातें
पार्थिव शिवलिंग की पूजा को केवल एक कार्य के रूप में न देखें। यह कोई दिखावे की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से जुड़ने का एक पवित्र माध्यम है। यदि कोई सच्ची श्रद्धा, शुद्ध मन और सही विधि से पूजा करता है, तो वह निश्चित ही भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा का पात्र बनता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि पूजा संपन्न हो जाने के पश्चात् पार्थिव शिवलिंग को अधिक समय तक घर में नहीं रखना चाहिए। समस्त नियमों का पालन करते हुए उसका विसर्जन पास के किसी पवित्र नदी, तालाब, कुंड अथवा गमले में कर देना चाहिए।
शिवलिंग पूजा के लिए सबसे शुभ दिन कौन-सा है?
हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन का अपना एक विशेष महत्व होता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पूजा के लिए सावन के सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत तथा सोमवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। हालांकि, यदि मन में सच्ची श्रद्धा हो, तो यह पूजा विधिपूर्वक किसी भी दिन की जा सकती है।
मिट्टी के शिवलिंग बनाकर पूजा करने से क्या होता है?
मिट्टी पंचतत्त्वों में से एक है, इसलिए किसी भी धार्मिक कार्य में इसका विशेष महत्व होता है। यदि कोई व्यक्ति मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उसकी आराधना करता है, तो भोलेनाथ उसके सभी मनोरथों और कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण करते हैं।

