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धार्मिक

मकर संक्रांति क्या है? यहाँ देखें इस साल का शुभ मुहूर्त

प्रकाश साहू
प्रकाश साहू
Byप्रकाश साहू
वरिष्ठ संपादक
प्रकाश साहू एक अनुभवी वरिष्ठ लेखक हैं, जो हिंदी विषय, धर्म और मनोरंजन से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़ रखते हैं। आपका उद्देश्य पाठकों तक सटीक,...
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- वरिष्ठ संपादक
समय: 7 मि.
मकर संक्रांति क्या है

इतने वर्षों से इस पर्व को बड़ी धूम-धाम से मनाते आ रहें हैं लेकिन आपको पता है कि मकर संक्रांति क्या है? इस पर्व को केवल धार्मिक आस्था के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, अपितु यह समस्त जीव-जंतुओं, पर्यावरण और विज्ञान को एक भावनात्मक तालमेल के साथ बांधकर रखते हैं।

यह पवित्र परम्परा न जाने पिछले कितने वर्षों से सकारात्मक ऊर्जा, ऋतु परिवर्तन और सामूहिक चेतना से जोड़ने का काम करता आ रहा है। यह खास पर्व आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तो है ही, साथ ही ये वैज्ञानिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से आपस में सम्बन्ध या जुड़ाव को भी दर्शाता है।

मकर संक्रांति क्या है, इस दिन कौन से महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति वह अद्भुत दिन है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी के साथ सूर्य की गति दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाती है, जिस कारण कहीं-कहीं पर इस पर्व को उत्तरायण भी कहते हैं।

यह खगोलीय बदलाव प्राकृतिक चक्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। इस दिन से प्रकृति में निम्न परिवर्तन देखने को मिलते हैं

  • दिन बड़ी और रातें छोटी होने लगती हैं।
  • सूर्य की तापमान में वृद्धि होने लगती है।
  • ठंड की असर कम होने लगती है।

मकर संक्रांति हर वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर की पहली माह जनवरी में 14 तारीख को ही मनाई जाती है।

आवश्यक जानकारी

भारतीय पंचांग के मुताबिक इस साल मकर संक्रांति पर शुभ मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व रहता है, जिसका समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।

मकर संक्रांति का महत्व कृषि और किसान जीवन में

जैसा कि आप सभी जानते हैं भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, मकर संक्रांति और किसानों के बीच एक अटूट रिश्ता बना हुआ है।

मकर संक्रांति और किसानों के बीच सम्बन्ध:

  • रबी फसलों की आगमन का संकेत मिलता है,
  • किसान सूर्य, धरती और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करते हैं,
  • ग्रामीण इलाकों में मेले और विभिन्न प्रकार के उत्सवों का आयोजन होता है, विशेष रूप से नदी किनारें बसे गांवों में।

भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति के अन्य नाम

मकर संक्रांति भारतवर्ष में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है, जैसे कि – उत्तर भारत में खिचड़ी या मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, असम में भोगाली बिहू, गुजरात में उत्तरायण और पंजाब में लोहड़ी।

तिल-गुड़ का महत्व: परंपरा के पीछे छिपा है एक गहरा विज्ञान

बहुत स्वास्थ्य कर्मचारी मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ खाने की सलाह देते हैं। जब टिल और गुड़ का मिश्रण होता है तो यह एक औषधि की तरह काम करता है। तिल शरीर में गर्मी पैदा करता है और गुड़ पाचन तंत्र को ठीक करता है, इस प्रकार दोनों मिलकर ठंड से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से शरीर का बचाव करता है।

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तिल और गुड़ को मिलाने से एक मीठा व्यंजन तैयार होता है, जिसका सम्बन्ध मीठा बोलने से है। यह लोगों को सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने का सन्देश देता है।

पतंगबाज़ी: उत्सव के साथ कर्तव्यों को भी समझें

मकर संक्रांति के दिन कई जगहों पर पतंगबाजी का आयोजन किया जाता है। इस प्रतिस्पर्धा में हर वर्ग के लोग हिस्सा लेते हैं, खासकर बच्चे और युवा। आज के समय में पतंग उड़ाना मकर संक्रांति का सबसे लोकप्रिय और आकर्षक हिस्सा बन गया है। ये पतंगबाजी सिखाती है कि हमें हमेशा ऊँचाइयों की ओर बढ़ते रहना चाहिए।

हालांकि आधुनिक समय में हमारी यह कर्तव्य बनती है कि हमें इंसानों, जानवरों और पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण-अनुकूल धागों का उपयोग करना होगा। कोई भी परंपरा तभी सार्थक सिद्ध होती है जब हम उनका निर्वहन पूरी जिम्मेदारी के साथ करते हैं।

आधुनिक दौर में मकर संक्रांति का महत्व

इस डिजिटल और भाग-दौड़ भरी जीवन में ठहराव बहुत जरूरी है, और मकर संक्रांति का पर्व हमें हमेशा यह याद दिलाती है कि –

  • परिवर्तन प्रकृति का नियम है, इसीलिए जीवन में परिवर्तन को सहज भाव से स्वीकार्य किया जाना चाहिए,
  • प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है,
  • हर स्थिति में सकारात्मक सोच को अपनाना होगा क्योकि बिना सकारात्मक सोच और अनुशासन के प्रगति असंभव है।

मकर संक्रांति का त्यौहार भारतीय ज्ञान परंपरा का एक जीता-जागता उदाहरण है। जैसे धागे में ढेर सारे मोतियों को पिरोने से एक सुन्दर माला बनता है वैसे ही यह पर्व विज्ञान, संस्कृति, कृषि और जीवन-दर्शन को एक सूत्र में बांध के रखता है।

यह पर्व सिखाता है कि हमें भी सूरज की भांति अंधकार से प्रकाश की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर और निष्क्रियता से सक्रियता की ओर निरंतर बढ़ते रहना चाहिए।

अधिक पूछे जाने वाले सवाल

मकर संक्रांति के पीछे क्या कहानी है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने धरती लोक पर राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना की थी। इसके साथ ही एक मान्यता यह भी सुनने को मिलती है कि इस दिन भागीरथ गंगा जी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लायें थे। इसी कारण मकर संक्रांति के दिन गंगा जी या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति का पर्व क्यों मनाया जाता है?

हिन्दू धर्म में सूर्य को देवता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इसका नाम मकर संक्रांति पड़ा और इसे एक पर्व/उत्सव के तौर पर मनाया जाने लगा। ऐसा कहा जाता है कि संक्रांति के दिन अन्न, वस्त्र आदि का दान करने से पुण्य मिलता है।

मकर संक्रांति कब है?

मकर संक्रांति प्रतिवर्ष लगभग 14 जनवरी को मनाया जाता है। हालाँकि पंचांग में इसके शुभ मुहूर्त का समय अलग-अलग हो सकता है लेकिन इस पर्व की तारीख में कोई बदलाव नहीं होता।

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