हिंदू धर्म में पूजा का विशेष महत्व होता है, जहाँ सभी देवी-देवताओं के पूजा-पाठ के नियम अलग-अलग होते हैं, जिनमें से एक हनुमान चालीसा पाठ करने के नियम भी हैं। हम सभी को जीवन में कभी न कभी ऐसा समय देखना पड़ता है जब कोई भी काम सफल नहीं हो रहा होता या हर पल एक अनजाना डर सताता है। धर्माचार्य कहते हैं कि ऐसे समय में हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति हर कठिन परिस्थिति से बाहर निकल सकता है।
इस लेख में हनुमान चालीसा पाठ करने के सही नियम और विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। यह जानकारी हमने धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले अनुभवी पुरोहितों से चर्चा करके प्राप्त की है, ताकि आप संकटमोचन हनुमान जी के आशीर्वाद से अपने जीवन की सभी बाधाओं को दूर कर सकें।
हनुमान चालीसा पाठ क्या है?
हनुमान चालीसा, गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा अवधी भाषा में रचित 40 चौपाईयों का एक भक्तिपूर्ण प्रार्थना है, जिसकी शुरुआत में 2 दोहा और अंत में 1 दोहा शामिल है। इस चालीसा को पराक्रम, ज्ञान और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसका हर एक चौपाई शक्तिशाली मंत्र के समान है। हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि जो भी व्यक्ति इसका पाठ करता है, उन पर हनुमान जी की कृपा बनी रहती है और उसके जीवन में परेशानियाँ कम होने लगती हैं।
हनुमान चालीसा का पाठ क्यों करना चाहिए?
हनुमान जी सात चिरंजीवियों में से एक हैं इसलिए इन्हें कलयुग में सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक के रूप में पूजा जाता है। हनुमान चालीसा में उल्लेखित पंक्ति (संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा) के अनुसार, इसका पाठ करने वालों के जीवन से संकटों और पीड़ाओं का नाश होता है। साथ ही, यह चंचल मन को शांत करता है और भय से मुक्ति प्रदान करता है।
इसके अलावा, यह दिव्य स्तोत्र हर वर्ग के लोगों, खासकर छात्रों और नौकरीपेशा वालों के लिए आत्मविश्वास और एकाग्रता बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसका पाठ मंत्र जाप की तरह काम करता है और मन स्थिर होने लगता है। एक कथा में यह वाक्यांश आता है कि शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो भी सच्ची श्रद्धा और भक्ति से इस पाठ को करेगा, उसे शनि दोष से राहत मिलेगी।
इस विधि से हनुमान चालीसा का पाठ करें
धार्मिक विशेषज्ञों (पुरोहितों) के कथनों के अनुसार, कोई भी धार्मिक अनुष्ठान करते समय मन में श्रद्धा और प्रेम-भाव रखना चाहिए। अगर इन भावों के साथ सही विधि का पालन किया जाए, तो जल्दी फल मिलता है:
- उचित समय: शास्त्रों में सुबह ब्रह्म मुहूर्त को सबसे अच्छा समय बताया है। अगर किसी कारणवश सुबह न कर पाए, तो शाम को सूर्यास्त के बाद पाठ कर सकते हैं।
- स्वच्छता: शुद्धता का विशेष ध्यान दें और सूर्योदय से पहले स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें। यदि उपलब्ध हो सके, तो लाल या पीले रंग का वस्त्र धारण करें।
- आसन: ज़मीन पर ऊनी या कुशा का आसन बिछाकर बैठें। बिना आसन लगाये ज़मीन पर बैठकर पाठ नहीं करना चाहिए।
- दीप और जल: हनुमान जी की मूर्ती या चित्र (फोटो) के सामने गाय के घी का या चमेली के तेल का दीपक जलाएं। ताम्बे के लोटे को अच्छे से मांजकर साफ करें फिर उसमें स्वच्छ जल भरकर अपने समीप रखें। पाठ के बाद इस जल को ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
- प्रारम्भ: पाठ शुरू करने से पहले सच्चे मन से प्रभु श्री राम का ध्यान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज भी इस कलयुग में जब कहीं पर राम-कथा का आयोजन होता है, तो बजरंगबली स्वयं एक श्रोता के रूप में कथा श्रवण करने आते हैं।
हनुमान चालीसा पाठ करने के नियम
ज्यादातर लोग जब किसी संकट या पीड़ा से गुजर रहे होते हैं, तभी अध्यात्म के रास्ते पर कदम बढ़ाते हैं। वे चाहते हैं कि बिना किसी नियमावली के सारी समस्याओं का समाधान हो जाए, क्योंकि विधि-नियम उन्हें उलझन की तरह लगते हैं। अगर आप सच में चाहते हैं कि आपके रुके हुए या बिगड़े काम बनें, तो श्रद्धा और विश्वास के साथ इन नियमों का पालन ज़रूर करें:
- ब्रह्मचर्य का पालन: जो साधक नियमित पाठ करते हैं या किसी विशेष दिन (मंगलवार/शनिवार) पाठ करते हैं, उसे मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- सात्विक भोजन: हनुमान जी भगवान राम के सेवक होने के साथ एक संत भी हैं, इसलिए उनकी सेवा करने वाले भक्तों को मांस, मदिरा और तामसिक भोजन (प्याज-लहसुन का अधिक प्रयोग) से दूर रहना चाहिए।
- संख्या का संकल्प: अपने समय और सामर्थ्य को ध्यान में रखते हुए 1, 7, 11 या 21 बार पाठ करने का संकल्प लें। ऐसा माना जाता है कि शत पाठ (100 बार पाठ) करने से विशेष सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
- एकाग्र मन: पाठ करते समय बीच में रुककर इधर-उधर की बातें न करें। जब तक चालीसा पूरा न हो, तब तक अपने आसन को न छोड़ें।
सम्पूर्ण हनुमान चालीसा लिखित में
यहाँ दोहा और चौपाई की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। एक साधक के लिए बेहतर यही है कि वह बुक स्टोर से हनुमान चालीसा की एक किताब खरीद ले। क्योंकि मोबाइल या किसी अन्य डिवाइस के जरिए पाठ करते समय मन इधर-उधर भागता है और कई तरह के काम याद आने लगते हैं। लेकिन किताब मन की एकाग्रता बनाए रखती है।
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।। …
इसी प्रकार श्रद्धापूर्वक पूरी 40 चौपाइयां किताब से पढ़ें।
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
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हनुमान चालीसा: इन बातों का विशेष ध्यान रखें
अगर कोई साधक, जिन्हें संस्कृत या हिंदी के शब्द कठिन लगते हों, तो वे संगीत के माध्यम से चालीसा सुनें और याद करें, लेकिन शब्दों का गलत उच्चारण न करें। स्वयं को सबसे बड़ा भक्त समझकर पाठ न करें, क्योंकि यह अहंकार है। हमेशा मन में समर्पण और सेवा का भाव रखें। हनुमान जी दया और करुणा के सागर हैं, उनकी कृपा उन भक्तों पर होती है, जो दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहते हैं। इसलिए किसी भी निर्दोष प्राणी को तंग न करें।
निष्कर्ष
इस विश्वास के साथ चालीसा का पाठ करें कि बजरंगबली सब बिगड़े काम बनाएंगे। हो सकता है इसकी विधि में कुछ कमी हो या नियम कठिन लग रहे हों, लेकिन अगर मन में सच्ची श्रद्धा हो, तो हनुमान जी स्वयं रास्ता आसान बना देते हैं। हनुमान जी बल, बुद्धि और विद्या (बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार) के दाता हैं। इन तीनों से ही व्यक्ति को जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इस दिव्य पाठ को आज से ही अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। जय बजरंगबली! जय जय श्री राम!
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क्या महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ, बागेश्वर धाम सरकार द्वारा दिए वक्तव्य अनुसार, महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं। हिन्दू धर्म में कोई निषेध नहीं है, भक्ति का मार्ग सभी के लिए खुला है। मान्यतानुसार, मासिक धर्म के दौरान और मूर्ति को छुनें तथा चोला चढ़ाने से बचना चाहिए।
हनुमान चालीसा का पाठ किस दिन करना चाहिए?
नियमित रूप से इसका पाठ कर सकते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है।
क्या बिस्तर पर बैठकर पाठ कर सकते हैं?
नहीं, अगर आप अस्वस्थ है, तो कोई बात नहीं, हमेशा आसन लगाकर ही इस प्रभावशाली पाठ को करना चाहिए।

